आयुर्वेद व्यासपीठ की पुणे शाखा द्वारा निर्मित चरककल्पसुधा इस मूल मराठी पुस्तक के हिंदी अनुवाद का प्रकाशन 10 जनवरी को आयुर्वेद व्यासपीठ के अहमदाबाद में होने वाले आयुर्विवेक महोत्सव में होने जा रहा है ।
इस पुस्तक में चरकसंहिता के चुनिंदा 100 कल्पों का विस्तृत वर्णन है। अधिकरण, घटकद्रव्य, निर्माणविधि आदि अनेक बिंदुओं द्वारा कल्पों का अध्ययन तथा फलश्रुति में वर्णित प्रत्येक अवस्था में उस कल्प का कार्य कैसे होता है, इसका भी विवरण दिया गया है।
इस पुस्तक के संपादक वैद्य धनंजय कुलकर्णी हैं तथा ज्येष्ठ वैद्य रमेश नानल जी की प्रस्तावना प्राप्त हुई है। मूल मराठी पुस्तक की 1000 प्रतियां प्रकाशन पूर्व ही समाप्त हो जाना इसकी विशेष उपलब्धि है।
“चरकस्तु चिकित्सिते” इस उक्ति का प्रत्यय इस पुस्तक के अध्ययन से निश्चित रूप से प्राप्त होगा। यह पुस्तक विद्यार्थियों एवं चिकित्सकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी, इसमें कोई संदेह नहीं। इसलिए सभी शीघ्र से शीघ्र इस पुस्तक की प्राप्ति करें । प्रकाशन पूर्व विशेष छूट / रियायत के लिए https://www.ayurvedvyaspeeth.in इस वेबसाइट पर जाएं।




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